महाराष्ट्र में मंदिर खोलने चाहिए ?

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महाराष्ट्र देश की आर्थिक राजधानी जहां अनलॉक के तीसरे चरण में सरकारी दफ्तर , कुछ पाबंदियों के साथ प्राइवेट दफ्तर , जीम , पब , बार , होटल इत्यादि अनलॉक हो चुके हैं, वहां मंदिर अभी भी लॉक है । सवाल यह नहीं कि मंदिर को खोला जाए , सवाल यह है कि महाराष्ट्र में जहां कोरोना संक्रमित के आंकड़े 15 लाख के पार है। इसके बावजूद दूसरे सार्वजनिक स्थान खुल सकते हैं तो मंदिर को भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ खोला जा सकता हैं ।

बेशक मंदिर के मुद्दे पर राजनीति होगी और वह हो भी रही है पर यह केवल राजनीति का विषय नहीं है। यह एक आस्था का भी विषय है। अपनी दुकान खोलने जाने से पहले मंदिर के दर्शन करने जाने वाले उस व्यापारी की आस्था का विषय है। रोज मंदिर जाने वाले उस भक्तों की आस्था का विषय है। उस दादा की आस्था का विषय है जो अपने पोते पोतियो को उंगली पकड़कर मंदिर ले जाते हैं और भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का ज्ञान देते हैं।

बेशक corona के केस बढ़ना एक चिंता का विषय है, परंतु जब मंदिर के पुजारी आपसे कहे कि वह डब्ल्यूएचओ की सारी गाइडलाइंस का पालन करने को तैयार है। सरकार की सारी गाइडलाइंस का पालन करने को तैयार है। मंदिर को रोज सैनिटाइज करने को तैयार है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को तैयार है तो इसमें गलत क्या है। अगर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मदिरालय खुल सकते हैं तो मंदिर जहां दर्शन ही लाइन में खड़े रहकर किए जाते हैं, ऐसे में मंदिरों को खोला जाना चाहिए ।

निष्कर्ष : उज्जैन में महाकाल मंदिर खुल सकता है। दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर खुल सकता है। चारधाम खुल सकते हैं तो महाराष्ट्र में मंदिर सकते हैं। मॉल , बार , पब खोलकर महाराष्ट्र सरकार ने बड़े व्यापारियों को राहत दे दी है। परंतु मंदिर के बाहर फूल का ठेला लगाने वाले को , पुजा प्रसादी बेचने वाले को , पुजारियों को भी राहत मिलना चाहिए । सरकार इस विषय पर भी थोड़ा ध्यान केंद्रित करें ।

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